पन्द्रहवी सदी के अन्तिम वर्षों में यूरोप मे वहुत
से बदलाव हो रहे थे | उनदिनों लोगों के पास
खाद्य पदार्थो को सुरक्षित रखने के लिए रेफ्रिज
रेटर नही थे लोग चीजों को सुखाकर या उस
पर नमक लगाकर प्रिजर्व करते थे | भोजन को
स्वादिष्ट वनाने के लिये यूरोप में लोग मशालो का
प्रयोग करते थे | इन मशालो के लिये वे एशियाइ
देशों पर निर्भर थे | लेकिन कुछ समय बाद ब्या
पारिक भूमार्गों पर तुर्की साम्राज्य का नियंत्रण
हो गया | परिणामस्वरूप स्पेन और पुर्तगाल ने
वास्कोडिगामा के नेत्रित्व में समुद्री रास्ते से वर्ष
1498में भारत की खोज की | इस दौरान भारत
के व्यंजनो मे भी मशालो का प्रयोग शुरू हुआ |
वास्कोडिगामा के वापस जाने के बाद जब पुर्त
गालिओं ने भारत के साथ ब्यापार शुरू किया
तो विभिन्न मशालों एवं सब्जियों का आदान
प्रदान शुरू हुआ | आलू टमाटर कद्दू काजू मिर्च
पपीता अमरूद अनानास धनिया लालमिर्च
लहसुन व हल्दी जैसे मशाले और सब्जियां
भारत को पुर्तगाल की देन है |
सोमवार, 2 मार्च 2015
वास्कोडिगामा
सोमवार, 12 जनवरी 2015
देवरिया राजनैतिक
सात विधान सभा क्षेत्र -
१- रूद्रपुर २- बरहज ३- रामपुर कारखाना
४- देवरिया सदर ५- पथरदेवा ६- सलेमपुर
७- भाटपाररानी है |
तीन संसदीय-
१- देवरिया- * देवरिया * रामपुरकारखाना
* पथरदेवा * तमकुही
* फाजिलनगर |
२- बासगॉव- * रूद्रपुर * बरहज * बासगॉव
* चौरीचौरा * चिल्लूपार
३- सलेमपुर- * सलेमपुर * भाटपार * सिकन्दर
पुर * वासडीह * वैरिया |
देवरिया
देवरिया जिले में -
सोलह विकास खण्ड . १-देवरिया सदर
२- गौरीबाजार ३- बैतालपुर ४- देसही देवरिया
५- रामपुर कारखाना ६- पथरदेवा ७- तरकुलवा
८- भटनी ९- भाटपाररानी १०- बनकटा
११- सलेमपुर १२-भागलपुर १३- बरहज
१४- लार १५- भलुवनी १६- रूद्रपुर हैं।
पॉच तहसीलें १- रूद्रपुर २-देवरिया सदर
३- बरहज ४- सलेमपुर ५- भाटपाररानी है |
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