पन्द्रहवी सदी के अन्तिम वर्षों में यूरोप मे वहुत
से बदलाव हो रहे थे | उनदिनों लोगों के पास
खाद्य पदार्थो को सुरक्षित रखने के लिए रेफ्रिज
रेटर नही थे लोग चीजों को सुखाकर या उस
पर नमक लगाकर प्रिजर्व करते थे | भोजन को
स्वादिष्ट वनाने के लिये यूरोप में लोग मशालो का
प्रयोग करते थे | इन मशालो के लिये वे एशियाइ
देशों पर निर्भर थे | लेकिन कुछ समय बाद ब्या
पारिक भूमार्गों पर तुर्की साम्राज्य का नियंत्रण
हो गया | परिणामस्वरूप स्पेन और पुर्तगाल ने
वास्कोडिगामा के नेत्रित्व में समुद्री रास्ते से वर्ष
1498में भारत की खोज की | इस दौरान भारत
के व्यंजनो मे भी मशालो का प्रयोग शुरू हुआ |
वास्कोडिगामा के वापस जाने के बाद जब पुर्त
गालिओं ने भारत के साथ ब्यापार शुरू किया
तो विभिन्न मशालों एवं सब्जियों का आदान
प्रदान शुरू हुआ | आलू टमाटर कद्दू काजू मिर्च
पपीता अमरूद अनानास धनिया लालमिर्च
लहसुन व हल्दी जैसे मशाले और सब्जियां
भारत को पुर्तगाल की देन है |
सोमवार, 2 मार्च 2015
वास्कोडिगामा
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